Jo kamme sura so dhamme sura
यह प्रचलित कहावत लगती है: “जो कर्मे सुरा, सो धर्मे सुरा.” इसका सरल अर्थ है—जैसे तुम्हारे कर्म होंगे, वैसा ही तुम्हारा धर्म और जीवन बनेगा। Jain Dharam में यह विचार प्रमुख है कि जीव के भीतर की आत्मा अपने कर्मों के कारण बंधती है या मुक्त होती है।
मुश्किल सवालों के उत्तर:
- कर्म (कर्मा) ही आत्मा के भव और मोक्ष तय करते हैं। अच्छे कर्म आत्मा को शुद्ध करते हैं; बुरे कर्म bondage बढ़ाते हैं।
- सही आचरण, सम्यक दर्शन (सत्य, अहिंसा, तप, संयम) और वातावरण के अनुरूप जीवन जीना मोक्ष की राह को सरल बनाता है।
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में मूल सिद्धांत वही रहते हैं, पर कुछ साधना-चिन्ह और पाठ-परंपराओं में भिन्नताएं हो सकती हैं।
अगर आप चाहें, मैं इस विषय से जुड़ी एक खास Jain sutra या stotra का मूल पाठ और उसका सही arth (भावार्थ) दे सकता हूँ, ताकि आप स्पष्ट समझ पाएं।