Naam kerm ki 1 prakati
Naam Karma (नाम कर्म) Jain धर्म के आठ प्रकार के कर्मों में से एक है। इसका मुख्य प्रभाव नाम, प्रतिष्ठा और सम्मान से जुड़ा होता है।
एक prakriti (एक प्रकार/आकार) इसका यही है:
- Pratishtha (प्रतिष्ठा): लोगों के बीच नाम-शौकत और मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होना। यानी संसार में आपकी प्रसिद्धि, सम्मान और सम्मान की स्थिति बनना।
ध्यान दें:
- Naam Karma का उद्देश्य आत्मा के ऊपर लिप्त असत्य नाम-प्रतिष्ठा का असर है, जो भीतर से जीव को पवित्र नहीं बनाता, बल्कि बहिरगत सुख-टिकावन (श्रद्धा-मान) को प्रभावित करता है।
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में Naam Karma के कथन और उसका प्रभाव कुछ स्थानों पर भिन्न व्याख्या हो सकती है, पर दोनों ही इसे मृत्यु-समय तक इच्छित परिणामों के रूप में मानते हैं: नाम-प्रतिष्ठा ही एक पहचान है।
यदि आप चाहें, मैं Naam Karma के बारे में और अधिक स्पष्ट दैनंदिन उदाहरणों या शास्त्रीय स्वरूपों के साथ समझा सकता हूँ।