लौकांतिक dev शाश्वत hote hai kya
संक्षिप्त उत्तर: नहीं। लौकांतिक (इन्द्रिय-सम्पन्न) देव शाश्वत नहीं होते; वे भी जन्म लेते-मरते हैं और कर्म के बंधन में रहते हैं।
स्पष्ट बात:
- देव लोग लोक-सृष्टि में रहते हुए सुख-शांति पाते हैं, पर वे भी कर्मानुसार जन्म-मरण करते हैं और अंततः फिर जन्म लेते हैं।
- केवल मोक्ष प्राप्त आत्माएँ (सिद्ध, अरिहंत आदि) शाश्वत होती हैं—वे जन्म-حدन से मुक्त हो जाती हैं।
- दिगंबर-श्वेताम्बर दोनों परंपराओं में यह अवधारणा है कि देवतागण भी संसार के बंधन में रहते हैं और न तो वे कभी अजर-अमर होते हैं न ही वे अंतिम लक्ष्य से अधिक ऊँचे रहते हैं।
अगर आप चाहें, मैं सरल उदाहरणों के साथ इस विषय की और व्याख्या कर सकता हूँ।