Ek Parichay kaun sa
Parichay (परिचय) का मतलब होता है परिचय या आरम्भ की प्रस्तुति।
Jain धर्म में अक्सर “Ek Parichay” के तौर पर जो परिचय पाठ किया जाता है, वह Namokar Mantra (नमोकार मंत्र) है। यह प्रार्थना Jain path का आरम्भिक प्रार्थना रूप है और पाँच महाव्रतों या पाँच सम्वेदनाओं से पहले श्रद्धा व्यक्त करने का एक सामान्य परिचय मानी जाती है। इसके माध्यम से श्रद्धालु अरिहंत (जिन्होंने मोक्ष पाया), सिद्ध (जन्म-रहित आत्मा), आय 바라 (आचरण) आदि की महिमा को स्मृत करते हैं।
नोट:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में Namokar Mantra के अर्थों या उद्धृती के क्रम/विवेचन में कुछ छोटे-सोचे اختلاف हो सकते हैं, लेकिन मूल उद्देश्य वही रहता है: जैन मार्ग के प्रमुख दस आत्माओं और मार्ग के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना।
- अगर आप किसी खास पाठ या ग्रंथ का “परिचय” पूछ रहे हैं (जैसे किसी विशिष्ट स्तोत्र या ग्रंथ के ओपनिंग सेक्शन का परिचय), कृपया उसका स्पष्ट नाम बताएं ताकि मैं उसका सही अर्थ और पार्श्व-परंपरागत विवेचन दे सकूं।
अगर आप चाहें, मैं Namokar Mantra का सरल अर्थ भी समझा सकता हूँ or Digambar/Shwetambar दोनों परंपराओं के अनुकूल अलग व्याख्या भी दे सकता हूँ।