आत्मानुशासन किसने लिखा
आत्मानुशासन ग्रंथ के लेखक के रूप में पारंपरिक रूप से माने जाते हैं:
- आचार्य गुणभद्र स्वामी (Gunbhadra). यह संस्कृत स्तोत्र/श्लोक्त्र का प्रमुख लेखक माना गया है, और इस ग्रंथ के 270 श्लोक उनके द्वारा रचित बताए जाते हैं। सामान्यत: इसे दिगम्बर परंपरा के दिग्गु्रमग्ग आधार पर मान्यता दी जाती है। (तथ्य वही रहता है कि इस ग्रंथ का नाम और रचना गुणभद्र की है।)
किसी-किसी परंपरा में इसके समान नाम के अन्य ग्रंथ भी बताए जाते हैं—पर वे अलग-अलग समय में लिखे गए अन्य लेखक ठहराये जाते हैं (जैसे पार्श्वनाग या जिनेश्वराचार्य द्वारा रचित आत्मानुशासन के उदाहरण). तथापि मौलिक/प्रमुख निवासी लेखक के रूप में गुणभद्र का नाम ही अधिक मान्यता प्राप्त है।
सामान्य तौर पर यह ग्रंथ 9वीं–10वीं शताब्दी के आस-पास लिखा गया माना जाता है।
नोट
- यदि आप चाहें, तो मैं Digambar और Shvetambar परंपराओं के अनुसार इस ग्रंथ के कुछ वैचारिक भिन्नताओं के बारे में भी सरल शब्दों में बता दूँ।