Abhigyan gyanpyogi muni shri ke ma’am batayiye
समझ गया। “Abhigyan gyanpyogi muni” शब्द Jain धर्म-संस्कारों में सामान्य तौर पर उन मॉनियों या साधकों के बारे में प्रतीत होता है जिनके पास अति-विशेष ज्ञान या सिद्धियों का आभास (abhigyan) होने का विचार किया जाता है। Jain शास्त्रों में साधु-जन इतने महत्त्वपूर्ण होते हैं कि वे इन सिद्धियों के प्रति आसक्ति नहीं रखते और आत्म-संयम के रास्ते पर टिके रहते हैं; siddhis (सिद्धियाँ) एक तरह से आध्यात्मिक प्रगति के अवरोध भी मानी जाती हैं, क्योंकि उनसे मोह और अहंकार बढ़ सकता है।
अगर आपका सवाल किसी विशेष muni/स्तोत्र/ग्रंथ के संदर्भ में है, तो कृपया उसका साफ नाम या पाठ बताइए ताकि मैं सही अर्थ और संदर्भ के साथ उत्तर दे सकूँ। Jain धम्म में अलग-विभिन्न परंपराओं (दिगंबर/श्वेताम्बर) के भीतर भी शब्द-मतों में थोड़ा अंतर हो सकता है, जिसे मैं स्पष्ट करके बताऊँगा।