चार ज्ञान के धारी कौन हैं? तीर्थंकर भगवान, सयोग केवली, आयोग केवली, गणधर देव
चार ज्ञान के प्रकार (Jnana) कौन से हैं:
- मति ज्ञान (Mati Jnana)
- श्रुत ज्ञान (Shrut Jnana)
- अवधी ज्ञान (Avadhi Jnana)
- केवल ज्ञान (Kevala Jnana)
संक्षिप्त अर्थ:
- केवल ज्ञान: पूर्ण omniscience; सभी स्वरूपों और समयों के बारे में साक्षात ज्ञान.
- अवधी ज्ञान: स्थान-काल-स्थितियों के अनुसारclairvoyance/विवेकपूर्ण ज्ञान,past-present-future को समझना.
- श्रुत ज्ञान: शिक्षित-उद्धृत ज्ञान, गुरु-आचार्यों की वाणी से प्राप्त सत्य ज्ञान.
- मति ज्ञान: सामान्य मन के द्वारा प्रेरित विवेक, अनुमान और अनुभव से लिया गया ज्ञान.
तीर्थंकर भगवान के पास चारों ज्ञान एक साथ रहते हैं। गणधर देव (Ganadharas) को सामान्यतः श्रुत ज्ञान के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं, और सयोग/अन्य केवली से सम्बद्ध धारणा के अनुसार कुछ ज्ञान виды भी विशेष प्रकार के होते हैं। लेकिन मुख्य चार ज्ञान के प्रकार वही हैं जिनका ऊपर उल्लेख किया गया है; उनके धारक किन-किन प्रवृत्तियों के अनुसार वर्णित होते हैं, यहDigambar बनाम Shwetambar परंपराओं में कुछ स्थानों पर भिन्न विवरण मिल सकता है।