आप्त का लक्षण क्या है? मोक्षमार्ग के नेता (हितोपदेशी), सर्वज्ञ, वीतरागी, तीनो ही
आप्त का लक्षण (लक्षण-5) सूत्र में तीन गुण साथ हो, तो वही आप्त माने जाते हैं:
- मूल पाठ (उच्चारण भाग): आप्तेनोच्छिन्नदोषेण, सर्वज्ञेनागमешिना भवितव्यं नियोगेन, नान्यथा ह्याप्तता भवेत्॥५॥
- अर्थ ( arth ) — वे दोषों से रहित, अर्थात वीतरागी; सर्वज्ञ (सर्वज्ञता) के ज्ञाता आगम के ईश, और हितोपदेशी (भव्यों को हित की शिक्षा देने वाले) होने से ही आप्त कहलाते हैं। इन तीनों गुणों के बिना आप्त नहीं हो सकते।
इन तीनों गुणों के बिना मतांतर हो तो वह आप्त नहीं माने जाते:
- वीतरागी: द्वेष-राग-लोभ से पूर्ण विरक्ति।
- सर्वज्ञ: त्रिकालवर्ती सभी पदार्थों और उनकी पर्यायों को समग्र रूप से जानने की योग्यता।
- हितोपदेशी: सर्वजन के हित के लिए उपदेश देने की प्रवृत्ति।
संक्षेप में: जो दोष-रहित (वीतरागी), सर्वगुण से संपन्न (सर्वज्ञ) और सद्गुण उपदेशक हों (हितोपदेशी), वही आप्त हैं; जो इन गुणों में से किसी एक से भी रहित हों, वे आप्त नहीं माने जाते।
नोट: Digambar और Shwetambar परंपराओं में इन तीनों गुणों की पहचान और महत्व सामान्यतः एक-जैसा ही माना जाता है; परन्तु सन्निकर्ष और दिग्दर्शन-प्रचार में भाष्य-व्याख्या में कुछ पारंपरिक भिन्नताएँ अलग-अलग विद्यालयों में मिल सकती हैं।