परोपदेश के बिना ही दर्शनमोहनीय का उपक्षम , क्षम या क्षयोपक्षम होता है , एवं परद्रव्यों से भिन्न आत्मा की प्रतीति होती है वह क्या है? निसर्गज सम्यग्दर्शन, अधिगमज सम्यग्दर्शन, औपशमिक सम्यग्दर्शन, क्षायोपशमिक सम्यग्दर्शन
औपशमिक सम्यग्दर्शन।
व्याख्या ( Arth ):
- दर्शनमोहनीय का उपशम जिस प्रकार होता है, वह औपशमिक सम्यग्दर्शन है. इसका meaning वही है कि दर्शनमोहनीyah के क्षय-उपशमन के कारण आत्मा की सही प्रतीति (परद्रव्य से भिन्न) उत्पन्न होती है, और यह उपशम सहज नहीं, बल्कि भीतर के उपायों से संभव होता है.
- अगर क्षय या क्षयोपशम से जन्म लेने वाले प्रकार देखें, तो वे क्षायिक और क्षायोपशमिक प्रकार हैं; उपरोध रूप में दर्शनमोहनीय का उपशम औपशमिक के भीतर माना जाता है।
ध्यान दें:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में इस विषय के भाषा-व्याख्या में कुछ भिन्नताएँ हो सकती हैं, पर सार वही है: दर्शनमोहनीय का उपशम/क्षय-उपशम वही औपशमिक सम्यग्दर्शन है।