जिस वस्तु को हम जानना चाहते हैं, उसका स्वरूप कथन करना है? स्वामित्व, स्थिति, निर्देश, अधिकरण
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हाँ. जिस वस्तु को जानना है, उसका स्वरूप बताने के साथ उसकी चार महत्वपूर्ण सूचनाएँ भी दी जाती हैं:
- स्वामित्व (स्वामित्व/स्वामिनी): वह वस्तु किसके पास है या कौन उसका स्वामी है।
- स्थिति (स्थिति): वह वस्तु कहाँ स्थित है, उसकी स्थिति क्या है।
- निर्देश (दिशा): वह वस्तु किस दिशा में है या उसकी दिशा-प्रकार क्या है।
- अधिकरण: वह वस्तु किस क्षेत्र, क्षेत्राधिकार या प्रयोग के अंतर्गत आती है।
ये चारों सूचनाएँ मिलकर वस्तु का संपूर्ण परिचय देती हैं—स्वाद, रूप, और परिघटना के अलावा—जैन epistemology में वस्तु की ज्ञान-प्राप्ति के समय इन्हें भी स्पष्ट किया जाता है। Digambar और Shwetambar परंपराओं में इन मानक विवरणों के कुछ स्थानों पर भिन्न व्याख्याएँ भी मिलती हैं, लेकिन मूल विचार यही है कि स्वरूप के साथ इन चार आयामों का वर्णन किया जाए।
यदि आप चाहें, मैं इसे सरल उदाहरण सहित और स्पष्ट कर दूँ या JainKnowledge से सम्बंधित पन्ने देखकर आपको सटीक संदर्भ दे दूँ।