बहुपदेशी द्रव्य को क्या कहते है
बहुपदेशी द्रव्यyard = पंचास्तिकाय
- बहुपदेशी द्रव्य वे पाँच द्रव्य हैं जिन्हें अस्तिकाय कहा जाता है: जीव (Jiva), पुद्गल ( pudgala ), धर्म ( dharma ), अधर्म ( adharma ) और आकाश ( akasha ).
- इन पाँचों में काल ( kala ) एक प्रदेशी के रूप में मानी जाती है; उसका बहुपदेशी होना नहीं माना जाता, इसलिए इसे बहुपदेशी द्रव्य नहीं गिना जाता। अगर काल को जोड़ा जाए तो द्रव्य छह हो जाते हैं, जिसे चर्चा में “छः द्रव्य” कहा जाता है।
- दोनों सम्मेलन (Digambar और Śvetāmbara) इस विषय पर समान तौर पर मानते हैं कि काल एक अलग द्रव्य के रूप में माना गया; पर जात—काल को लेकर कुछ पाठों में अलग-अलग प्रस्तुतियाँ हाल में मिलती हैं।
संक्षेप में: बहुपदेशी द्रव्य वे पाँच द्रव्य हैं जिनमें प्रत्येक का क्षेत्र/प्रदेश है—जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश। काल अलग माना गया है, इसलिए बहुपदेशी नहीं गिना जाता। अगर काल को शामिल कर लिया जाए, तो कुल छह द्रव्य बनते हैं।