मन,वचन,काम की चंचलता को रोकना क्या कहते है
यह चंचलता रोकना Jainism में “संयम” कहा जाता है। मन (मन्स), वचन (वचन) और कर्म (शरीर/काय) की चंचलता को रोकना यानी इन तीनों पर नियंत्रण रखना आत्मा को कर्म के बंधन से बचाने की दिशा में प्रमुख अभ्यास है।
- संयम का मतलब: विचार, भाषा और क्रिया तीनों में निर्मलता, शुद्धता और स्थिरता बनाए रखना।
- यह मार्ग-दर्शन अक्सर पाँच महाव्रतों और नैतिक अनुशासन के साथ जुड़ता है, ताकि अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि पर चलकर जीवन शुद्ध और आत्म-कल्याणकारी बने।
- विभिन्न दिगंबर-श्वेतांबर परंपराओं में संयम के व्यवहारिक तरीके कुछ हद तक भिन्न हो सकते हैं, पर मूल विचार—मन-वचन-काय का संयम—एक ही रहता है।
मेरे जवाब में अगर आप चाहें तो मैं इस विषय के लिए सटीक स्रोत का संक्षिप्त सार भी दे सकता हूँ।