कर्मो का आत्मा मै एक देश छूटना को क्या कहता है?
कर्म का सिद्धांत Jainism में आत्मा के मोक्ष से जुड़ा है, भूगोल (देश) से नहीं। 시장:
- कर्म (कर्मा) आत्मा पर बंधन डालते हैं क्योंकि विचार, वाणी और कर्म ही उनके कारण बने होते हैं। देश बदलने से वे बंधन खुल नहीं जाते।
- मोक्ष तभी संभव है जब जीव अपने ज्ञान, Darshan, और चरित्र (यथार्थ आचरण) को purification करें—यानी सही दृष्टि, सही ज्ञान और सही आचरण अपनाएं।
- मोक्ष पाने के मार्ग में अहम तत्व हैं: अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, और सच्चे तप-ध्यान के साथ सही मार्ग (समग्र आचरण) अपनाना।
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में कर्म-बंध व मोक्ष के विचार में ऐतिहासिक और धार्मिक कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं, पर मूल विचार यही है कि देश/स्थान से स्वतंत्र रहते हुए कर्मों को शुद्ध करने से आत्मा को liberation मिलता है।
अगर आप चाहें तो मैं इस विषय पर Jain ग्रंथों के सच्चे अर्थ (arth) के साथ और सरल उदाहरण देकर समझाने में मदद कर सकता हूँ।