वह कौन सी जगह है जहां सदैव मुनिराज रहते हैं
मुनि किसी एक निश्चित जगह पर सदैव नहीं रहते हैं। जैन साधु सामान्यतः मार्ग-चर्या से घूमते रहते हैं और मांग-लाभ (भिक्षा) के आधार पर आगमन-निवास करते हैं।
जहां वे ठहरते हैं, उसे आम तौर पर "विहार" कहा जाता है — यानी मुनियों के लिए संस्थागत आश्रम/मठ जैसे स्थान। कभी-कभी वे वन या जंगल में भी Tapovan/वनवास करते हैं, विशेषकर परंपरागत तप साधना के दौरान। संप्रदाय (दिगंबर बनाम श्वेतांबर) के अनुसार कुछ स्थानीय मठ/आश्रम की परंपरा हो सकती है, पर मूल विचार यही है कि मुनि का प्राथमिक निवास स्थायी नहीं, बल्कि सामयिक/आवश्यक स्थिति के अनुसार होता है।