Navkar ki mudra
Navkar mudra, जो अक्सर Namokar Mudra के नाम से भी जाना जाता है, Jain धर्म में नामोकार मंत्र (Namokar Mantra) के समय किया जाने वाला मुख्य आचरण-शीर्ष मुद्रा है। यह अहंकार-रहित नम्रता और सभी तीर्थंकरों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
कैसे करें (सरल तरीका) -assis: शांत बैठें या क़ायदे से खड़े रहें, रीढ़ सीधी रखें।
- दोनों हाथ जोड़े हुए सामने की ओर लाएं (कमर के पास या सीने के स्तर पर), हथेलियाँ एक-दूसरे से मिली हों।
- उंगलियाँ ऊपर की ओर-oriented हों; अंगूठे हल्के से टिकी हों या एक दूसरे के ऊपर आराम करें।
- कुछ क्षण रुककर नमोकार मंत्र का जाप करें (यानी Namokar Mantra के पांच समूह: Arihantas, Siddhas, Acharyas, Upadhyayas, Sadhus/Sadhvis)।
Tradition के बीच भिन्नताएं
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में मूल विचार एक ही है: तीर्थंकरों के प्रति सम्मान और आत्म-सुधार के लिए नम्रता। छोटे-छोटे फिंगर-या हथेली की स्थिति में हल्का अंतर हो सकता है, पर उद्देश्य वही रहता है: भगवंतों के प्रति श्रद्धा और सात्विक जीवन की प्रेरणा।
लाभ/उद्देश्य
- मन को एकाग्र करना और सांस-चालना सहज बनाना
- नैतिक शुद्धि, नम्रता और करुणा की साधना को प्रवर्तित करना
- नौमОД्य (Navkar) मंत्र के पठन-श्रवण के साथ भीतर की शुद्धता बढ़ाना
अगर चाहें, मैं Navkar मंत्र के चार/पाँच समूहों के अर्थ भी सरल हिंदी में संक्षेप में दे सकता हूँ—या कैसे नियमित अभ्यास में इसे शामिल करें, इस पर मार्गदर्शन दे सकता हूँ।