ऐसे जैन बेरिस्टर जिन्होने जैन लॉ का निर्माण कर जैन मुनियों के विहार पर प्रतिबंध हटवाया था?
ये जैन लॉ बनवाने और मुनियों के विहार-प्रतिबंध हटवाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दो प्रमुख बरीस्टर (वकील) थे:
- Jagmandar Lal Jaini (जगमंदर लाल जैनि): वे Barrister थे और Bhadrabahu Samhita का अनुवाद सहित Jaina Law की पुस्तक के प्रकाशन-कार्य के केंद्र में थे। उनके प्रयासों से जैन विधि (Jaina Law) का एक संगठित ढांचा बना और इससे मुनियों के अधिकारों की रक्षा में मदद मिली। ( books.google.com, jainqq.org)
- Champat Rai Jain (C.R. Jain): वे Digambara जैन समुदाय के एक प्रमुख बरीस्टर थे जिन्होंने जैन कानून के विकास के लिए काम किया, Jaina Law Society की स्थापना में भूमिका निभाई और कानून-आधारित धार्मिक अधिकारों के लिए आंदोलन चलाया। उनका योगदान आधुनिक जैन लॉ के निर्माण में बहुत अहम माना जाता है। ( en.wikipedia.org)
नोट: ब्रिटिश राज के समय मुनियों के नग्न रहने पर प्रतिबंध जैसी क़ानूनी बाधाओं के खिलाफ जैन समुदाय ने विरोध किया और अंततः कुछ प्रतिबंधों को हटवाने में ये कानून-संस्थापक और उनके सहयोगी भूमिका निभाते रहे। मुनियों के नग्न-यात्रा पर अस्थायी बाधाओं के बारे में 1927-1928 के समय शांति-प्रमुख विरोध-प्रचार और सरकार-परिर्वतन के संदर्भ भी जुड़ते हैं। ( jainqq.org, en.wikipedia.org)
अगर आप चाहें तो मैं इन दोनों के कार्यों से जुड़ी JainLaw (Bhadrabahu Samhita) और Jaina Law Society के संदर्भित पाठों/संदर्शनों के बारे में और सरल सार दे सकता हूँ।