Share meri bhavna
बहना (inner feeling) Jain Dharma में बहुत अहम है। यहाँ कुछ सरल “bhavna” हैं जिन्हें आप अपने दैनिक अभ्यास में लाकर पुण्य-मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं:
- अहिंसा की भावना: हर जीव के प्रति करुणा और हिंसा से बचना।
- क्षमा-भाव: गलत فهم या चोट लगने पर भी मन-वचन-काय से क्षमा करना।
- असमता (निरोध) की भावना: जड़-आशा-क्रोध से मुक्त रहने की कोशिश, संतोष बनाए रखना।
- संयम-भाव: परमिश्रित द abstinence (संयम) के साथ आवश्यक साधनों पर टिके रहना।
- दयान्विता (दया) की भावना: दूसरों की परेशानियों के प्रति संवेदना और सहायता की इच्छा।
- अपरिग्रह की भावना: आवश्यक ही चाहिए, अवश्यक वस्तुओं से नहीं, वस्तुओं के मोह से दूरी।
- आत्म-निरीक्षण: अपने कर्म, विचार और दोषों पर नियमित ध्यान रखकर सुधार की कोशिश।
इन bhavna को साधना के साथ जोड़ना कैसे करें:
- प्रतिदिन कुछ मिनट शांत बैठकर अपनी सोच की समीक्षा करें: क्या आपके विचार हिंसा, क्रोध या असत्य की ओर उन्मुख हैं?
- छोटे-छोटे अहिंसक कार्य चुनें, जैसे मीठी मीठी बातें, सकारात्मक बातें कहना।
- क्षमा-याचना और क्षमा-स्वीकृति के पल बनाएं; सामने वाले के दोष ढाँढ़ना कम करें।
- जरूरत से अधिक वस्तुओं के मोह से बचते हुए साधारण lived life अपनाएं।
अगर आप चाहें तो मैं आपकी स्थिति के अनुसार एक सरल दैनिक bhavna-चक्र (ध्यान/साधना क्रम) बना दूँ।