Sabhi tintharkaro me se kiski aaradhna karni chahiye
Jain dharma में सभी 24 तीर्थंकरों की आराधना का आदान-प्रदान माना गया है। यानी आप किसी एक तीर्थंकर को चुनकर भी आराधना कर सकते हैं, और कई तीर्थंकरों की आराधना एक साथ भी कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
- सामान्यतः सब तीर्थंकरों का समान सम्मान किया जाता है; उनके जीवन-उद्गार और अहिंसा, सत्य, तप आदि के मार्ग को अपनाने पर ज़ोर दिया जाता है।
- बहुत से अनुयायी महावीर जी (24वें तीर्थंकर) की आराधना को प्रमुख मानते हैं, क्योंकि उन्होंने Jain धर्म को व्यवस्थित और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। पर यह अनिवार्य नहीं है; महावीर के बिना भी अन्य तीर्थंकरों की आराधना होती है।
- Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में मूल सिद्धांत एक ही रहता है: सभी तीर्थंकरों का आदर करें, और उनके उपदेशों को जीवन में उतारें।
- यदि आप किसी विशेष दायरे/दिनचर्या के अनुसार आराधना करना चाहें, तो आप अपनी गाम/मंदिर की स्थानीय परपरा और गुरु की अनुमति से निर्णय ले सकते हैं।
संक्षेप में: Sabhi tintharkaro ki aaradhna संभव है। सामान्यतः महावीर जी की आराधना को प्रमुख माना जाता है, पर हर तीर्थंकर का आदर करना भी Jain मार्ग का हिस्सा है।