A se shuru hone waale jain sidhant
नीचे A से शुरू होने वाले कुछ मुख्य Jain सिद्धांत दिए गए हैं, जो जैन धर्म की बुनियादी शिक्षा में आते हैं:
- Ahimsa (अहिंसा): बिना हिंसा के जीवन जीना—हानि पहुँचाने से दूरी बनाए रखना।
- Anekantavada (अनेकान्तवाद): प्रत्येक चीज़ के कई दृष्टिकोण हो सकते हैं, एक ही सत्य को सभी कोणों से समझना चाहिए।
- Aparigraha (अपरिग्रह): अनावश्यक आश्रय-सम्पदा और वस्तुओं से मितव्ययिता, अति-लिप्सा से दूर रहना।
- Arjava (आर्जव): सत्य के साथ ईमानदार रहना, कपट-छल से बचना।
- Arihanta (आरिहंत): वे जो अंतिम पंथ तक पहुँच कर जीवों के योग-सम्बन्ध को जानते हैं और जिनकी शिक्षाओं का पालन किया जाता है।
- Ayambil (आयाम्बिल) आदि उपवास/व्रत के रास्ते: संयम और तपस्या के दौरान भोजन में विशेष साधना करना (यह साधना खासकर कुछ दिनों में की जाती है)।
इनमें से:
- अहिंसा, अपरिग्रह और आर्जव अक्सर एक साथ व्यवहारिक जीवन के मूल नैतिक नियम माने जाते हैं।
- अनेकान्तवाद कारण-मीमांसा में विविध दृष्टिकोणों को ग्रहण करने की जगह देता है; यह जैन दर्शन की बहु-आयामी समझ को दर्शाता है।
- आरिहन्त और आयाम्बिल जैसे शब्द विशिष्ट पंथ-परंपराओं के भीतर विशिष्ट संदर्भ रखते हैं और Digambar/Shwetambar परंपराओं में इनकी व्याख्या में मामूली भिन्नता देखी जाती है।
यदि आप चाहें, मैं इनमें से किसी एक सिद्धांत का मूल पाठ (स्त्रोत) और उसका शुद्ध arth (भाष्य अर्थ) Digambar/Shwetambar दोनों परंपराओं के अनुसार सरल भाषा में दे सकता हूँ।