प्रश्न 1 :- वह कोन है जो कभी मोक्ष नहीं जा सकता है ? जैन दर्शन के अनुसार, अभवी जीव वह होता है जो कभी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता, क्योंकि उसमें सम्यक्-दर्शन नहीं होता है, जो मोक्ष के लिए अनिवार्य है। प्रश्न 2 :- वे कोनसे मुनीराज थे जिनसे इन्द्रजीत के पु
नीचे आपके दिए प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दिए गए हैं।
1) अभवी जीव कौन हैं?
- अभवी जीव वे जीव होते हैं जिनमें सम्यक्-दर्शन नहीं होता है, इसलिए वे मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते। यह मान्यता जैन दर्शन में बताई गई है कि मोक्ष के लिए सम्यक्-दर्शन आवश्यक है। यह विचार दिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदायों में मान्य है, भिन्न ग्रंथों में इसे अलग-अलग विवरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
2) वे मुनि जिनसे इन्द्रजीत के पुत्र वज्रमालि ने मुनिदीक्षा ली थी?
- Vajrakumar (वज्रकुमार) ने मुनिदीक्षा मुनि धंगिरी (Dhangiri) से ली थी।
3) उनके सिर पर जलती हुई सिगड़ी रखने वाले मुनिराज का नाम?
- कथाओं में जिन मुनिराज के सिर पर जलती हुई सिगड़ी झुलसी, उनका नाम महात्मा गजसुकुमार मुनि है।
4) तत्वार्थ सूत्र में कितने सूत्र हैं?
- तत्वार्थ सूत्र में कुल 423 सूत्र हैं (आचार्य उमास्वाती द्वारा रचित जैन दर्शन का महत्वपूर्ण ग्रंथ)।
5) निम्न में से किस क्षेत्र में कर्म भुमिया मनुष्य रहते हैं?
- भरतक्षेत्र (Bhārata-kṣetra) में ही कर्म-भूमि स्थित मानी जाती है; सही विकल्प (अ) भरतक्षेत्र है।
यदि आप चाहें, मैं इनमें से किसी प्रश्न के लिए अधिक विस्तृत व्यাখ्या ( arth ) और प्रमाणित संकलनों के संदर्भ भी दे सकता हूँ.