सामायिक लेने का पाठ
यहाँ सामायिक लेने का सामान्य पाठ (विधि) प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसे श्वेतांबर परंपरा में विशेष रूप से अपनाया जाता है:
1. नमस्कार मंत्र: णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमोक्कारो, सव्वपावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं॥
2. सामायिक का संकल्प (प्रतिज्ञा) : इहं में समाइयं, पवित्तं, पवित्तेणं, ठाओ, पवित्तेणं, कालेणं, पवित्तेणं, भावेणं, पवित्तेणं, अणुपुव्वं, पवित्तेणं, समाइयं कत्तुं समणुज्जाणामि।
3. सामायिक का विधान:
- शांत चित्त होकर, समता भाव धारण करें।
- तीन बार 'सामायिक' शब्द का उच्चारण करें।
- आसन, काल, भाव, ठान आदि की पवित्रता का स्मरण करें।
- भावना करें: मैं राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया, लोभ आदि से मुक्त होकर सभी जीवों के प्रति समभाव रखूंगा।
- मंत्र जाप, स्तुति, पाठ या स्वाध्याय करें।
- सामायिक का समय (सामान्यतः 48 मिनट/एक मुहूर्त) पूर्ण होने पर 'सामायिक उद्यापन' (समापन) करें।
4. क्षमापना (माफी माँगना): मिच्छामि दुक्कडं (यदि सामायिक में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा याचना करें।)
5. समापन:
- भगवान की स्तुति करें।
- वंदना करें।
- सामायिक समाप्ति की भावना करें।
नोट:
- दिगंबर परंपरा में शब्दों, विधि, एवं मंत्रों में कुछ भिन्नता हो सकती है।
- सामायिक लेते समय सफेद वस्त्र, पवित्र स्थान और शांत वातावरण का ध्यान रखें।
महत्व: सामायिक का अर्थ है—समता की साधना। सभी जीवों के प्रति सम भाव रखना और मन, वचन, काया को संयमित करना।
यदि आपको विशेष परंपरा (दिगंबर/श्वेतांबर) के अनुसार विशिष्ट पाठ या विधि चाहिए, तो कृपया उल्लेख करें।