सामायिक लेने का पाठ lyrics
यहाँ सामायिक लेने का पाठ (सामायिक का संकल्प) प्रस्तुत है, जो जैन धर्म में प्रचलित है:
सामायिक का संकल्प:
णमहं सिद्धाणं। णमहं अरिहंताणं। णमहं अयरियाणं। णमहं उवज्झायाणं। णमहं लोए सव्वसाहूणं।
एषो पंच नमोक्कायाणं, सव्वपावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पडमम हवइ मंगलं।
संकल्प:
इच्छामि समाइयं, समाइये थाउं, समाइयं पज्जवाणेमि। इच्छामि खमासमणं, समाइये पज्जवाणेमि। इच्छामि असोहमं, समाइये पज्जवाणेमि। इच्छामि ठवणं, समाइये पज्जवाणेमि। इच्छामि आयरियस्स उवसग्गाहनं, समाइये पज्जवाणेमि।
अर्थ: मैं सामायिक करना चाहता/चाहती हूँ, सामायिक में बैठता/बैठती हूँ, सामायिक की प्रतिज्ञा करता/करती हूँ।
सामायिक में ध्यान रखने योग्य कुछ पंक्तियाँ:
समायिक काल में मन, वचन, काय से पाप नहीं करना है। सब जीवों के प्रति समभाव रखना है। राग-द्वेष का त्याग करना है। प्रभु के ध्यान, स्वाध्याय, जप, ध्यान आदि में समय बिताना है।
समाप्ति पर:
सामायिक समाप्त करने का संकल्प:
इच्छामि समाइयं समापए। इच्छामि खमासमणं। इच्छामि अयारियस्स उवसग्गाहनं।
नोट: सामायिक का पाठ क्षेत्र, गच्छ, परम्परा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है। आपके स्थानीय जैन मंदिर या आचार्य द्वारा प्रचलित पाठ पूछना भी उचित रहेगा।
अगर आपको विस्तार से पूरा सामायिक पाठ (पूरी प्रक्रिया सहित) चाहिए तो कृपया बताएं।