Kon se trithanker ki 44 pidiyan mosh gye
ऐसा प्रचलन जैन धर्म में नहीं है। जैन धर्म के अनुसार कुल 24 तीर्थंकर माने जाते हैं और उनके बारे में प्रमुख साहित्य में केवल इन 24 तीर्थंकरों की कहानी बताई जाती है; “44 पिढियाँ” के बारे में कोई सामान्य या प्रमाणित जैन पाठ नहीं बताता।
अगर आप किसी खास ग्रंथ, पाठ, या परम्परा की बात कर रहे हैं तो कृपया उसका नाम स्पष्ट करें—ताकि उसी के अनुसार सही संदर्भ दे सकूँ (Digambar और Shwetambar परंपराओं में कभी-कभी पाठ-प्रविधियाँ या अर्थों में भिन्नता हो सकती है, पर मुख्य संकल्पना 24 तीर्थंकर ही है)।