Jain samaj meh jo ratri bojan k tyag k liye jo sogan lete he vo kese lete he
रात्रि भोज Tyag (रात्री भोजन त्याग) Jain समाज में एक प्रमुख अणुव्रत है। इसका अर्थ है: रात को भोजन न करना और सूर्योदय से पहले भोजन समाप्त करना।
कैसे चलते हैं (सरल तरीके से):
- अधिकांश जैनों का वास्तविक नियम यह है कि भोजन सूर्यास actual sunset से पहले समाप्त कर दें। इससे रात को अन्न-जल-लेह्य आदि नहीं लिया जाता।
- बेहतर अभ्यास यह है कि एक मुहूर्त पहले ही भोजन खत्म कर दें (लगभग 48 मिनट पहले), ताकि भोजन पूरी तरह दिन में ही पूरा हो जाए।
- दिन के दौरान पानी/जरूरत के अनुसार तरल पदार्थ लेने की अनुमति कई जगहों पर निर्धारित परिपाटी के अनुसार होती है; परन्तु रात में जल-औषधि आदि जैसी चीजें भी सामान्यतः नहीं ली जातीं। यदि चिकित्सीय आवश्यकता हो, तो स्थानीय आचार्यों की सलाह से कदम उठाये जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि:
- Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में मूल उद्देश्य बराबर रहता है: अहिंसा, संयम और आत्म-निग्रह के लिए रात के भोजन के Tyag को महत्व देना। हालांकि कुछ संप्रदायों में जल/दवा आदि के सेवन के बारे में विशिष्ट नियमों में छोटे-छोटे अंतर हो सकते हैं, पर मुख्य सिद्धांत एक ही है।
आप अधिक स्पष्ट निर्देश और अभ्यास कैसे करें, इसके बारे में पढ़ सकते हैं: You can read more here
नोट: अगर आप चाहें, तो मैं इस विषय पर आपके स्थान के अनुसार नजदीकी संगीह/आचार्य के अनुसार मार्गदर्शन भी दे सकता हूं।