आलू में अनंत जीव होते हैं या असंख्यात
जैन धम्म के अनुसार हर जीव जiva होता है—यहाँ तक कि पौधों और सब्ज़ियों के भीतर भी जिव रहते हैं। आलू आदि पौधों के भीतर भी अनगिनत (असंख्य) जीव होते हैं, क्योंकि प्रत्येक कोशिका-स्तर पर जीवन का आत्मा-स्वरूप जiva मौजूद हो सकता है। अतः आलू में जीवों की संख्या असंख्यात/अनंत मानी जाती है।
संक्षेप में: आलू में जिव अनंत और असंख्यात हैं। यह समझ जैन धर्म की सार्वत्रिक जीवन-जगत की स्पष्ट मान्यता के अनुरूप है कि जीवन सभी स्तरों पर pervasive है, चाहे वह पौध हो या अन्य_any जीव।