Kya grahan me mandir band hote j
संक्षेप में जवाब: ग्रहन ( grahan) के कारण मंदिर बंद होना सारी Jain परंपरा में एक अनिवार्य नियम नहीं है। यह अधिकांश जगहों पर हिंदू परंपराओं से जुड़ा एक सांस्कृतिक व्यवहार है, ना कि जैन धर्म के शास्त्रों के بالص ठीक-ठीक निर्देश जैसा। कुछ समुदायों में Sutak/ग्रहण के समय विशेष नियम होते हैं, पर यह Digambar–Shwetambar के बीच भी भिन्न हो सकता है और हर मंदिर में लागू नहीं होता।
आमतौर पर Jain मंदिरों में ग्रहण के कारण अनिवार्य द्वार बंद रहने का निर्देश नहीं दिया गया है; जरूरत पड़ने पर कुछ समुदाय या स्थानीय गुरुदेव और संस्था के अनुसार समय-वार गतिविधियाँ बदली जा सकती हैं। अगर आप किसी खास जैन तीर्थस्थल के बारे में पूछना चाहें, तो वहाँ के स्थानीय नियम देखे जाते हैं।
आप इस विषय से जुड़ा एक सामान्य Jain मंदिर के बारे में जानकारी पढ़ना चाहें, तो यह पन्ना उपयोगी हो सकता है: