Goshalak na pramukh shravako
गोशालक (गोशालक मख्खलिपुत्र) का उल्लेख जैन आगमों में महावीर स्वामी के समकालीन के रूप में होता है, वे जैन धर्म के श्रावक (गृहस्थ अनुयायी) नहीं थे। वे 'अजीविक' नामक एक अन्य संप्रदाय के प्रवर्तक थे। अतः गोशालक के प्रमुख श्रावकों की कोई चर्चा जैन साहित्य में नहीं मिलती, क्योंकि वे स्वयं किसी अन्य मत के प्रवर्तक थे और जैन श्रावक नहीं माने जाते।
यदि आप किसी अन्य ऐतिहासिक या जैन आचार्य के प्रमुख श्रावकों के बारे में पूछना चाहते हैं, तो कृपया स्पष्ट करें।