पर्याप्त स्थलचर और पर्याप्त खेचर को मिलाकर कितने भेद होंगे
पर्याप्त स्थलचर और पर्यাপ্ত खेचर मिलाने पर केवल दो भेद होंगे — पर्याप्त स्थलचर और पर्याप्त खेचर।
संक्षेप में:
- स्थलचर: पर्याप्त
- खेचर: पर्याप्त
(ध्यान दें: Jain शास्त्रों में पांचेंद्रिय तिर्न्यंच के कुल 20 भेद बताए जाते हैं, जिनमें प्रत्येक जाति में पर्याप्त व अपर्याप्त दोनों अवस्थाएँ होती हैं; पर आपकी पूछी स्थिति में केवल पर्याप्त अवस्थाएँ लिए जाने पर यह दो भेद बनते हैं। Digambar–Shwetambar दोनों परंपराओं में यही केंद्रीय विचार समान रहता है।)
You can read more about these classifications in relevant Jain texts.