क्या चीटियां गर्भज जीव कहलाती है
हाँ, चीटियाँ भी जीव (jiva) हैं. Jain धर्म में जीवों को उनके इंद्रियों (इंद्रिय) की संख्या के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
- चीटियाँ त्रिंंद्रिय जीव (तीन इंद्रियाँ: स्पर्श, रस, घ्राण) मानी जाती हैं। इसका मतलब है कि वे स्पर्श, स्वाद और सुगंध/घ्राण जैसी संवेदनाओं को अनुभव कर सकती हैं, पर उनके पास sight और hearing जैसी चीजें हो सकती हैं या नहीं, यह जीव के प्रकार के अनुसार बदल सकता है। ( jainknowledge.com)
- garbhaj (गर्भज) जीव वह होते हैं जो गर्भ में रहते हैं, यानी भ्रूण अवस्था में होने वाले जीव। चींटियाँ सामान्यतः जन्म लेकर जीवित होती हैं, इसलिए उन्हें garbhaj के रूप में नहीं माना जाता। garbha अवस्था का विचार प्रवर्तित किया गया है तो हर जीव के जन्म से पहले के अवस्था से जुड़ा होता है, चींटियाँ सामान्य जन्म-प्रक्रिया में आती हैं। ( jainknowledge.com)
संक्षेप में:
- चींटियाँ जीव हैं और उनके इंद्रियाँ तीन तक मानकर triendriya वर्ग में आती हैं।
- garbhaj जीव-वर्ग सामान्यतः भ्रूण अवस्था से जुड़ा है; चींटियाँ अक्सर गर्भ-जिन अवस्था में नहीं मानी जातीं।