जैन धर्म के हिसाब से हमारे नाखून काटने के बाद उसमें कितने इंद्रियों वाले जीव उत्पन्न होते हैं
जैन धर्म के अनुसार नाखून काटने से कोई नया जीव नहीं उत्पन्न होता। नाखून एक अवयव है और उसे काटना सीधे-सीधे जीवों की रचना नहीं करता। जो जीव-जगत है, वह समूची ब्रह्मांड में 84 लाख (8.4 मिलियन) प्रकार के जीव-yoni के रूप में पहले से विद्यमान माना जाता है, जिनमें एक से पाँच इंद्रियों वाले जीव भी शामिल हैं। नाखून काटना उस क्रम को नहीं बढ़ाता, बल्कि सभी जीवों के प्रति अहिंसा रखना ही सही कर्म माना जाता है। ( jainknowledge.com)
संक्षेप में:
- एक-सेन्स वाले जीव (Ekendriya) से पाँच-सेन्स वाले जीव (Panchendriya) तक सभी प्रकार के जीव मौजूद माने जाते हैं। nails काटना इन्हें पैदा नहीं करता; यह अन्य जीवों के प्रति अहिंसा की सीख के अनुरूप है। ( jainknowledge.com)
अगर आप चाहें, मैं इन संकल्पनाओं के बारे में सरल उक्ति-उद्धरण भी दे सकता/सकती हूँ (जैन ग्रंथों के अनुसार).