Write a uttam kshama message from Jyoti Vimal Jain
यह uttam kshama संदेश Jyoti Vimal Jain की ओर से
मुझे आप सभी से अत्यंत विनम्र क्षमा चाहिए: यदि मेरे मन, वचन या कर्म से किसी को भी कोई दुख पहुँचा हो, तो मैं बिना शर्त क्षमा माँगती/मांगता हूँ। मिच्छामि दुःखक्खम (Micchami Dukkadam) के भाव से मैं यह क्षमा-पत्र देता/देती हूँ कि मेरी किसी कार्रवाई से आपके अहिंसा-आचार में अवरोध न आए।
मन से क्षमाप्रार्थना:
- मैं अपने सोच-व्यवहार को शुद्ध बनाकर आपके प्रति प्रेम और करुणा बनाने का संकल्प लेती/लेता हूँ।
- जो कुछ बोला गया, वह अगर किसी को दुख पहुँचा हो तो कृपया उसे स्वीकार करें और मुझे क्षमा करें।
- मेरी सभी क्रियाओं में अहिंसा, सत्य और सत्यनिष्ठा बनें, ऐसी मुझे प्रबल प्रेरणा रहे।
Digambar और Shwetambar परम्पराओं में अलग शब्द-रिवाज होते हैं, पर मूल उद्देश्य—मन, वचन, कर्म से क्षमा माँगना और दूसरों को क्षमा देना—एक ही है।
धन्यवाद।