सो बिहार उपवास करने से शाम को कौन सा पचकान लेना चाहिए
जैन धर्म के अनुसार, यदि आपने "सो बिहार" (जिसमें रात्रि भोजन वर्जित होता है) के व्रत का पालन किया है, और उपवास (fast) किया है, तो शाम के समय पचकान (पचखान) लेना आवश्यक होता है। पचकान का अर्थ है—रात्रि में अनशन, भोजन, जल आदि का त्याग करने का संकल्प लेना।
शाम को पचकान लेते समय आप निम्नलिखित संकल्प ले सकते हैं:
सामान्य पचकान संकल्प: "मैं आज रात्रि को सूर्यास्त के बाद कुछ भी नहीं खाऊँगा, न पीऊँगा, न जूस, न दूध, न फल, न दवा, न कुछ अन्य खाद्य-पदार्थ लूँगा।"
संस्कृत या प्राकृत में पचकान: "इहमस्सु रयणवस्से, इहं दिवसम्, अहम्, सूर्यास्तादारभ्य, रत्तिमे, अनशनं पच्चखामी।"
पचकान लेते समय क्या ध्यान रखें:
- पचकान सूर्यास्त से पहले ले लें।
- पचकान लेते समय मन, वचन और काया से पूर्ण संकल्प करें।
- यदि मंदिर या साधु-साध्वी के पास हैं तो उनके सान्निध्य में लें, अन्यथा घर पर अकेले भी लिया जा सकता है।
- रात्रि में जल, भोजन, दवा आदि का त्याग करें।
नोट: विभिन्न स्थानों और परंपराओं में पचकान की विधि और शब्द अलग हो सकते हैं, परंतु मूल भावना यही रहती है कि रात्रि में किसी भी प्रकार का आहार-जल ग्रहण नहीं करना है।
आप अपने संघ, मंदिर या गुरुजनों से विशेष पचकान विधि व संकल्प के बारे में भी पूछ सकते हैं।