Mahavir bhagwan ki shaadi me maas kyu katra tha
यह बात एक सामान्य भ्रांति हो सकती है। जैन धर्म के अनुसार महावीर स्वामी (वर्धमान) का विवाह यशोधा से हुआ था और उसके बाद वे गृहस्थ जीवन में थे, फिर उन्होंने तत्काल नहीं बल्कि थोड़ा बाद में मोक्षमार्ग की साधना शुरू की। महावीर का जीवन मूलतः अहिंसा (अहिंसा) और संयम के रास्ते का है, और अधिकांश जैन परंपराओं में शादी-विवाह के मौके पर भी अहिंसामूलक आचरण ही मान्य माना जाता है।
- महावीर की शिक्षा-प्रभृति और मोक्ष-मार्ग की दिशा स्पष्ट रूप से अहिंसा, अपरिग्रह और सत्य के सिद्धांतों पर केंद्रित है।
- स्पष्ट प्रामाणिक ग्रंथों में विवाह के समय या विवाह-वेलेंटाइन पर मांस-भक्षण का उल्लेख उसके प्रमुख जीवनचर्या के साथ नहीं मिलता; बल्कि एक गृहस्थ परिवार का दायित्व और सांसारिक जीवन की व्यवस्था रहती है।
- यदि किसी कथा में “मास” ( meat ) की बात आती दिखे, वह संभवतः अंधविश्वास, लोककथा या गलतफहमी होगी, क्योंकि जैन धर्म में साधु-संत भी क्यों न गृहस्थ रहते हों, अधिकांश पथ-मार्ग अहिंसात्मक आचरण पर टिके होते हैं।
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