jain 3 mool sidhhant
निश्चित रूप से। Jain धर्म के प्रमुख तीन मूल सिद्धांत (Mool Sidhdhant) हैं:
- अहिंसा Paramo Dharma — अहिंса सबसे बड़ा धर्म है। जीवन के प्रति गैर-हिंसा, सभी जीवों के प्रति करुणा और हिंसा से बचना इसका मूल भाव है।
- अनेकार्थवाद (अनेकान्तवाद) — सत्य अनेक रूपों में है; किसी भी बात को एकदम एक तरफ़ा नहीं समझना चाहिए। हर बात के कई आयाम हो सकते हैं; सही समझ के लिए विवेचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।
- अपरिग्रह — अनावश्यक वस्तुओं, इच्छा और आसक्तियों से दूरी रखना; साधनसामग्री पर निर्भरता कम करना और संयम रखना।
ये तीनों सिद्धांत संयुक्त रूप से Jain मार्ग के मूल ध्वज के रूप में प्रतिष्ठित माने जाते हैं और Digambar-श्वेतांबर दोनों संप्रदायों में इसी प्रकार महत्व रखते हैं। हाँ, कभी-कभी अलग सूत्रों में अन्य प्रस्तुतियाँ भी मिलती हैं (जैसे तीन जुड़वाँ-गुण या अन्य क्रम), पर सामान्य और व्यापक समझ के अनुसार ये तीनों ही “Mool Sidhdhant” माने जाते हैं।