Kis muni ne pratilekhana krk parmatma bane
Pratilakhana (प्रतिलेखना) नाम के बारे में जैन शास्त्रों में स्पष्ट स्वरूप से एक प्रसिद्ध घटना बताई नहीं जाती है कि किस muni ने इसे करके Parmatma बना। अक्सर Parmatma (परमात्मा) या KevalJnana प्राप्त कर Arihant/ठीरथंकर बनने का मार्ग साधना, तप और सही आचरण सेutta बताया गया है।
संक्षेप में:
- परमात्मा वह मुक्तात्मा है जो निरन्तर ज्ञान, दर्शन और जीव के कल्याण के साथ मोक्ष को प्राप्त कर लेती है।
- जैन ग्रंथों में kevala jnana प्राप्त कर लेने वाले अर्हंत/ठीरथंकर ही परमात्मा बनते हैं; इन्हीं के द्वारा संसार को वास्तविक ज्ञान होता है।
- Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में वास्तविक अर्थ और विधि में भिन्नताएं हो सकती हैं, लेकिन “प्रतिलेखना” द्वारा परमात्मा बनने का मानक वर्णन सामान्य तौर पर मिलता नहीं।
अगर आप चाहें, मैं इस विषय से जुड़ी सटीक भाषा (sutra/stotra) और उनके अर्थ Digambar–Shwetambar दृष्टी से सरल शब्दों में स्पष्ट कर सकता हूँ।