दिगंबर आमना के हिसाब से जो कहानी में लिख कर दे रही हूं उसे एक नाटक के रूप में बदल दें
बहुत अच्छा। आप जो कहानी लिखकर दे रही हैं, उसे मैं Digambar Jain दृष्ट्रिकोण से एक नाटक के रूप में ढाल दूँगा/दूँगी।
कृपया आपकी कहानी यहाँ पेस्ट करें। मैं इसका नाटक-रूप बनाकर:
- एक्ट, दृश्य, निर्मल मंच-निर्देश (स्टेज डायरेक्शन) बनाऊँगा/बनाऊँगी
- पात्रों के संवाद Digambar विचारधारा के अनुरूप रखूँगा/रखूँगी
- कथा के मूल सिद्धान्त, नैतिक शिक्षा और जैन धर्म के सार को संरक्षित रखूँगा/रखूँगी
- अगर Digambar और Shvetambar के बीच मतभेद हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से अलग-अलग भाव में दर्शाऊँगा/दर्शाऊँगी
आपकी कहानी मिलते ही मैं उसे क्रमवार एक नाटक-रूप (अधिनाटिका, दृश्य-वर्णन, संवाद, मोरल-नोट्स आदि सहित) में प्रस्तुत कर दूँगा/दूँगी.