Woh kaunse chaud purvadhar the jo pramaad ke vash se nigod me gaye
माफ़ कीजिए, इस विशेष शब्द “Chauda purvadhar” के बारे में मेरी जानकारी सुद्ध Jain स्रोतों में स्पष्ट नहीं मिलती। अगर आप “14 Purvas” या pramada (अविलम्ब/लापरवाही) से सम्बंधित बातें पूछना चाह रहे हैं, तो मैं वहीं से स्पष्ट Jain अर्थ के साथ जवाब दे सकता हूँ।
संक्षेप में शुद्ध Jain संदर्भ के अनुसार:
- Purvas: Jain ग्रंथों में पूर्व-लेख (Purvas) को अत्यंत प्राचीन और क़रीब-काशी माना गया है; इनका विवरण साधारण कुलीन शास्त्रों से अलग-अलग स्थानों पर मिलता है।
- Pramada: अविवेचन/लापरवाही के कारण कुछ घटनाओं का वर्णन मिलता है, पर यह सीधे तौर पर “ Chauda purvadhar” से जुड़ा एक स्थापित सिद्धांत नहीं है जैसा आप ने लिखा है।
अगर आप चाहें, मैं Jain संदर्भों के अनुसार सटीक अर्थ (arth), Digambar बनाम Shwetambar पर विभिन्न मन्तव्य और यदि उपलब्ध हो तो संबंधित शास्त्रों के अंश भी सरल भाषा में बताकर समझा दूँ। आप चाहें तो स्पष्ट करें कि आपको किस पाठ या शास्त्र से संबंधी व्याख्या चाहिए (जैसे Purva, pramada आदि)।