Jab kevali bhagwaan ko teeno loko aur teeno kaal ka gyaan hai iskta matlab sab pehle se hi nishcit hai ?
संक्षेप में जवाब:
- KEVAL JNANA (केवल ज्ञान) क्योंवल ज्ञान है, जो आत्मा को सभी वस्तुओं को हर जगह और हर समय के बारे में पूर्ण समझ देता है। इसका मतलब है कि जो व्यक्ति केवल हैं, उसे तीनों लोकों (अनंत द्रव्य-लोक) और तीन कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) का ज्ञान एक साथ दिख सकता है।
- यह पूर्व-निर्धारित है या न Nishcit? Jain दर्शन में ऐसा नहीं कहा जाता कि ज्ञान पहले से तय है कि कौन उसे पाएगा। केवल ज्ञान आत्मा का गुण है, जिसे कर्मों को साफ करने से खोला जा सकता है। यानी केवल और kevalin वही होते हैं जो इन्हें प्राप्त कर लेते हैं, और यह कर्म-उत्पत्ति मार्ग में सही पूजा, संयम और तप से खुलता है।
- অন্যান্য बातों से अलग-भिन्नता (Digambara बनाम Śvetāmbara):
- Shrutakevali बनाम Kevali: Shrutakevali सीधे संसंगों पर ज्ञान रखते हैं (श्रुति-ज्ञान), जबकि kevali प्रत्यक्ष ज्ञान (प्रत्यक्षा) के रूप में समस्त त्रि-लोको-काल का ज्ञान रखते हैं। दोनों के बीच ज्ञान की श्रेष्ठता और समत्व का मानक Jain धर्म में समान है, पर स्रोत और प्रकार में फर्क आता है।
यदि आप चाहें, मैं इस विषय पर मूल Jain धम्म-ग्रंथों से शब्द और उनके अरथ भी सरल शब्दों में दे दूँगा।