कौन से ज्ञान अविनाभावी होते हैं?
जैन Dharam में अविनाभावी (अविनाशी/अनंत) ज्ञान वही माना गया है जिसे कभी समाप्त नहीं किया जा सकता और जो सर्वज्ञता की स्थिति तक पहुँचाता है।
- सबसे बड़ा अविनाशी ज्ञान: केवल ज्ञान (Kevala Jnana)। यह पूर्ण, अपरिमित ज्ञान है और यह तिर्थंकरों तथा अरिहंतों जैसे आत्माओं द्वारा प्राप्त होता है। इसके अभाव में अन्य ज्ञान सीमित, उदाहरणार्थ इन्द्रियार्थ ज्ञान (संवेदना-आधारित) या स्वभाविक अनुमान पर आधारित ज्ञान होते हैं।
- Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में स्वीकार: केवल ज्ञान की प्रकृति और उसका असंदिग्ध आस्तित्व इन दोनों धाराओं के शास्त्रों में समान रूप से माना गया है। फर्क सिर्फ कुछ विवेचनात्मक बिंदुओं में हो सकता है, लेकिन अविनाशी ज्ञान के रूप में केवल ज्ञान ही सर्वज्ञता को दर्शाता है।
संक्षेप में: अविनाशी ज्ञान वही है जो अनंत है—केवल ज्ञान (केवल ज्ञान)—जो सर्वज्ञत्व की स्थिति तक لے जाता है; अन्य सभी ज्ञान सीमित, पर्यवेक्षण या अनुमान पर निर्भर होते हैं।