अनंत नाथ जी किस शिविका मे बैठकर दीक्षा लेने पधारें?
अनंत नाथ जी एक तिर्थंकर हैं, इसलिए उनके “दीक्षा लेने” जैसे कर्म का कोई मानक क्रम यहाँ नहीं लगता—तिर्थंकर स्वयं पूर्ण ज्ञान (KevalaJnana) और मुक्त अवस्था में होते हैं और संसार को सही मार्ग दिखाते हैं। सामान्य रूप से दीक्षा, आचार्य-निर्माण आदि प्रक्रिया साधारण श्रावक के लिए होती है, पर तिर्थंकर के लिए वह क्रम लागू नहीं होता।
“शिविका” शब्द Digambar या Shwetambar परंपराओं में भिन्न संदर्भों में आता है, लेकिन Anantnath के संदर्भ में ऐसी कोई कथा नहीं मिलती कि वे किसी विशेष शिविका में बैठकर दीक्षा लें। यदि आप किसी खास पाठ या शास्त्र के पाठ के बारे में पूछ रहे हैं, तो कृपया उसका नाम दें; मैं उसे सही संदर्भ सहित समझाने की कोशिश करूंगा।