स्थविर के प्रकार
स्थविर (sthavira) का सामान्य अर्थ Jain परंपरा में “बुजुर्ग साधु” या “दीर्घकालीन परंपराओं के वंश” से जुड़ा होता है। इसे किसी एक सख़्त रूप में एकीकृत वर्ग के रूप में नहीं माना जाता; बल्कि Jain परंपरा में द्वि-मुखी विभाजन और फिर कुछ उप-सम्प्रदायों के भीतर भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं।
संक्षिप्त रूप में प्रकार:
- मुख्य विभाजन: Digambara और Śvetāmbara—ये दोनों बड़े अनुयायियों के प्रमुख समूह हैं, जिनमें आचार-व्यवहार, दिगंम-उपासना और साहित्यिक धारा में भिन्नता पाई जाती है।
- Śvetāmbara के भीतर कुछ प्रमुख उप-सम्प्रदाय (जो सामान्यतः साधु-समुदायों के बीच सक्रिय रहते हैं) कि:
ध्यान रखें:
- स्थविर शब्द के ठोस वैज्ञानिक वर्गीकरण के बारे में कुछ स्रोतों में अलग-अलग वर्णन मिल सकता है क्योंकि इतिहास में संप्रदाय-परग्रहण समय-समय पर हुआ है।
- अगर आप Digambara बनाम Śvetāmbara के भीतर स्थविर से जुड़े आचार-व्यवहार, अनुष्ठान और साहित्यिक धारा में अंतर जानना चाहते हैं, तो मैं उसी अनुरोध के अनुरूप साफ-साफ बिंदुवार तुलना दे सकता हूँ।