सात नेरकों से निकालकर जीव कहां-कहां उत्पन्न होते हैं
सात नेरकों (नरक) से नरकवास जीवन समाप्त होने पर जीव फिर से संसार के किसी त्रिविध स्थान पर जन्म ले सकता है। सामान्य Jain दर्शन में ऐसा है:
- सबसे पहले वह फिर से ऊपरी लोकों में जन्म ले सकता है, जो मुख्यतः तीन प्रकार हैं:
- अंततः जो पुण्य और शुद्ध कर्म बनते हैं, वे मोक्ष तक पहुँचाने में मदद करते हैं; लेकिन नरक के कर्म समाप्त होते ही जीव को ऊपर के लोकों में जन्म लेने की तैयारी होती है।
यह सिद्धांत (सात नरक, उनके स्थान, और नरक से निकलकर कहाँ जन्म होता है) दोनों Śvetāmbara और Digambar परंपराओं में मान्य है, भिन्न पाठों में विवरणों का छोटे-मोटे अंतर हो सकता है, पर मूल धारणा समान है।
यदि आप चाहें, मैं इस विषय पर सात नरकों के नामों और उनके विशेष दण्ड-प्रकारों के बारे में संक्षेप भी दे सकता हूँ।