जैन धर्म के हिसाब से बहू और सास दोनों ही सती के नाम एक ही परिवार के कौन से हैं
संक्षेप में:
- जैन धर्म में “सती” शब्द का अर्थ एक पुण्यवान पत्नी से है, न कि किसी खास परिवार का नाम. बहू और सास दोनों के रूप में सती बनना या एक ही परिवार में दोनों को सती कहा जाना कोई खास निर्धारित सूची नहीं है.
- जहाँ तक “16 सती” (satī) का प्रमुख विचार है, यह Jain साहित्य में virtuous women के 16 प्रकारों को दर्शाने वाला एक क्रम है, जो महिलाओं के गर्भाधान/संस्कार से जुड़ा कर्मकथ्य है। इन 16 satīs के नाम अलग-अलग ग्रंथों में थोड़ा-बहुत भिन्न हो सकते हैं, पर इसका उद्देश्य नैतिक आदर्शों को बताना है, न कि किसी विशिष्ट परिवार-जोड़े का नाम तय करना. ( jainpedia.org)
अगर आप चाहें, मैं इस “16 सती” सूची के बारे में Jain स्रोतों से और स्पष्ट, संतुलित arth दे सकता हूँ याspecific ग्रंथों के नाम बता सकता हूँ. You can read more here