सागर धर्माम्रृत हे चरणानुयोगामध्ये येणाऱ्या धर्म ग्रंथाचे नाव आहे in jainism
65
हाँ. सागर धर्मामृत (Sagar Dharmamrit) वह धर्मग्रंथ है जो चरणानुयोग (Charananuyog) के अंतर्गत आता है/Related माना जाता है। इसे धर्मामृत का सागर कहा गया है और Digambar परंपरा में Pt. Ashadhar द्वारा रचित माना जाता है. यह ग्रंथ भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन से प्रकाशित एक प्रमुख धर्मग्रंथ है और संस्कृत-हिंदी मिश्रित पाठों सहित मिलता है। ( jainebooks.org)
- अर्थ (arth) – धर्मामृत का अर्थ है धर्म का अमृत, यानी जितना भी धर्मविद्या, शील और आचरण हैं, उनका पान-स्वादन करने योग्य तत्वों का समुद्र। “सागर” इसे व्यापक और गहरा बनाता है, और धर्म के उपाय-आचार को गूढ़ रूप में प्रस्तुत करता है।
- परंपरागत स्थिति – यह Digambar परंपरा में मान्य माना गया है; नाम और रचना-विवरण में विविध संस्करण मिलते हैं (कुछ संस्करणों में प्रकाशक/संस्करण भिन्न हो सकते हैं)।
अगर चाहें, मैं इस विषय से जुड़ी ओरिजिनल संस्कृत पद्यों की चर्चा और हिंदी टीका/अनुवाद के संदर्भ भी सरल भाषा में साझा कर सकता हूँ।
आप चाहें तो मैं जैनज्ञानकौशल साइट या जैनक्वीक में उपलब्ध पन्ने से सीधे पाठ के अंश भी दिखा दूँगा. आप कहिए आप किस प्रकार की मदद चाहते हैं.