14 raj lok
14 rajlok (पञ्चदश राजलोक) Jain cosmology में लोक-स्तर का vertical विभाजन है। इसे तीन हिस्सों में बाँटा गया है—ऊपर (Urdhva Loka), बीच (Madhya Loka), और नीचे (Adho Loka)—और इनकी कुल गिनती 14 राजलोक की है।
- ऊपर के देवलोक (7 लोक):/devlokas के रूप में माना जाते हैं, जहाँ देव-शरीरिय पात्र रहते हैं।
- मध्य लोक (Madhya Loka): वही मध्य-लोक जहाँ मनुष्य, जंतु और पौधे रहते हैं; यहाँ मोक्ष के मार्ग खुलते हैं।
- नीचे नरकलोक (7 लोक): प्रकाशित नरक-लोक जहाँ पाप के कर्मों के अनुसार यातनाएँ मिलती हैं।
संक्षेप arth:
- 14 राजलोक एक जगह से दूसरी जगह जाने के रास्तों और karma-फायलों को दिखाते हैं।
- Madhya Loka वह क्षेत्र है जहाँ जन्म-जीवन और मोक्ष की संभावनाएँ होती हैं।
- Devlok और Naraklok का क्रम karma के अनुसार ऊपर-नीचे की स्थिति तय करते हैं।
विशेष बातें:
- Digambara और Śvetāmbara के बीच थोड़ा फर्क पाठ-परंपरा में देखने को मिल सकता है, पर मूल विचार यही रहता है: तीन विश्व (ऊपर, बीच, नीचे) और 14 राजलोक का संरचनात्मक वजन।
अगर आप चाहें, मैं ऊपर के देवलोकों के नाम और उनके स्थान-क्रम का संक्षिप्त सूची दे सकता हूँ; या मध्य लोक (मध्यबिंदु) की व्याख्या भी सरल रूप में। आप किस पक्ष की स्पष्टता चाहते हैं?