vishwa kise kahte hai
संस्कृत/हिंदी में “विष्व” या “वishwa” का अर्थ होता है पूरी दुनिया-आकाश, धरती, स्वर्ग-नरक आदि समेत समूचा ब्रह्मांड। Jain धर्म में इसे लोक (loka) कहा जाता है।
Jain दृष्टिकोण से विष्व को जो-कुछ मिलकर बनाते हैं:
- जीव (Jiva) और अजीव (Ajiva): जहां जीव आत्मा है और अजीव वे पदार्थ हैं जिनमें पेड़-पात, पत्थर, हवा आदि शामिल हैं।
- सात तत्व ( tattvas ): मीमांसा के अनुसार कुल सात तत्व मिलकर दुनिया को चलाते हैं—जीव (Jiva), अजीव (Ajiva), पुद्गल (Pudgala), धर्म (Dharma), अधर्म (Adharma), आकाश (Akasha) और काल (Kala)।
- समय का चक्र: विष्व अनादि-नित्य है; कर्म के कानून से चलता है और समय-चक्र में गतिशील रहता है।
- तीन लोक-यात्रा: लोकों के बारहों जोन (उच्च लोक, मानव-लोक, नर्क आदि) मिलकर कुल ब्रह्मांड की संरचना बनाते हैं।
Digambar और Shwetambar दोनों ही इन बिन्दुओं को मानते हैं:
- विष्व वास्तविक, क्रमिक और कर्म-नियंत्रित ब्रह्मांड है।
- जीव और अजीव का मिश्रण ही विष्व है; और यह समय के साथ पुनर्उत्पन्न/बदला जा सकता है।
अगर आप चाहें, मैं इन बिंदुओं को सरल उदाहरणों या छोटे श्लोकों के साथ और स्पष्ट कर सकता हूँ।