शरीरा दि को आत्मा मानना कोनसे तत्व की भुल है
शरीर आदि को आत्मा मानना "मिथ्यात्व" (मिथ्या दृष्टि) तत्व की भूल है। जैन दर्शन में यह माना गया है कि आत्मा और शरीर अलग-अलग तत्त्व हैं। आत्मा चेतन तत्त्व है, जबकि शरीर जड़ तत्त्व है। जब कोई व्यक्ति शरीर, इंद्रियाँ, मन आदि को आत्मा समझ लेता है, तो यह मिथ्यात्व या अविद्या कहलाती है। मिथ्यात्व सम्यक् दर्शन (सही दृष्टि) के विपरीत है और यह संसार में बंधन का कारण बनता है।
इसलिए, शरीर आदि को आत्मा मानना मिथ्यात्व तत्व की भूल है।