Prasann Raj Rishi Ne yuddh ke liye ant Mein kiske upyog Kiya
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प्रसन्न राजऋषि (Prasann Raj Rishi) ने युद्ध के लिए अंत में "अहिंसा" (अहिंसा धर्म) का ही उपयोग किया। जैन धर्म के अनुसार, जब किसी राजा को युद्ध की परिस्थिति का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर अहिंसा, क्षमा, और शांति का मार्ग अपनाया। प्रसन्न राजऋषि ने अपने शत्रु के प्रति भी करुणा और क्षमा का भाव रखा, जिससे युद्ध की आवश्यकता ही समाप्त हो गई।
जैन धर्म के सभी राजऋषि और तीर्थंकर अहिंसा के मार्ग पर चलने की शिक्षा देते हैं और अंत में हिंसा का त्याग कर धर्म और सत्य का पालन करते हैं।