Alochana Path verse 2
Alochana Path verse 2 (दोहे में दूसरे पंक्ति)
Original text (Hindi/Devanagari): सुनिये जिन अरज हमारी, हम दोष किये अति भारी।
Meaning ( arth ) in Jain tradition:
- श्रद्धापूर्वक सुनिए हमारे दीन-विनय की प्रार्थना। हमने आज तक जो पाप या भूलें कीं, वे अत्यंत बड़े और भारी हैं।
- इसका आशय है कि भक्त अपनी गलतियों को स्वीकार करता है और भगवान/जिनराज के समक्ष अपने दोषों का ईमानदार ग्रहण करता है, ताकि आगे वे दोष दोहर न हों।
नोट: आलोचना-पाठ (Alochana Path) में कुछ पाठशैली Digambar बनाम Shwetambar में शब्द-योजनाओं में थोड़ी भिन्नता आ सकती है, पर मूल विचार समान रहता है: दोषों को स्वीकारना, क्षमा मांगना, और सही आचरण की ओर प्रतिज्ञा करना।
अगर आप चाहें, मैं इस श्लोक की पूरी पाठ-सूची और दूसरा/तीसरा श्लोक भी दे दूँ।
आप इसे पढ़ने के लिए यहाँ देखें (आपके लिए संदर्भ: Alochana Path की मूल पाठ और अर्थ)