Devlok se moksh kaise prapt hot hai
संक्षेप में उत्तर:
- Devlok (स्वर्ग आदि) कर्मों के कारण मिलता है, पर वह मोक्ष नहीं है। Devlok में रहने के बाद भी आत्मा के पास अभी भी कुछ कर्म बचे रहते हैं और अंततः वह पुनर्जन्म लेती है या देह त्याग कर नेतृत्त्व होकर Siddhasthal पहुंचना संभव है; इसलिए देवलोक से Mokṣhya नहीं मिलती।
- मोक्ष तब मिलता है जब आत्मा सभी कर्मों को समाप्त कर लेती है, जिससे उसका जन्म- death चक्र समाप्त हो जाता है और आत्मा निर्विकारी रूप से ब्रह्मस्वरूप से मिल जाती है। इसे Jain दर्शन में मोക്ഷ कहा गया है।
- रास्ता तीन आधातों (Tri-ratna) पर चलता है:
- Digambar तथा Shvetambar दोनों ही मोक्ष की मुख्य धारा को मानते हैं, पर कुछ गुरु-व्याख्या और साधना के तरीकों में सूक्ष्म भिन्नताएँ हो सकती हैं। दोनों के अनुसार आर्य दर्शन का मूल उद्देश्य तीनों गुणों को सही प्रकार से ग्रहण करना और कर्मों से मुक्त होना है।
- निष्कर्ष: Devlok में रहने से मोक्ष नहीं प्राप्त होता; मोक्ष तब मिलती है जब सभी कर्म समाप्त हो जाएँ और आत्मा Siddhasthal को प्राप्त करे।